Thursday, March 7, 2019

हाफिज का नाम प्रतिबंधित आतंकियों की लिस्ट से हटाने से यूएन का इनकार

नई दिल्ली. संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधित आतंकियों की लिस्ट से मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद का नाम हटाने से इनकार कर दिया है। भारत सरकार के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि जमात-उद-दावा (जेयूडी) के चीफ हाफिज ने यूएन से अपना नाम इस लिस्ट से हटाने की अपील की थी।

भारत ने मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की
यह फैसला उस वक्त आया है, जह संयुक्त राष्ट्र की सेंक्शन कमेटी से अपील की गई है कि जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाया जाए। पुलवामा हमले के बाद भारत समेत अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने यूएन से यह अपील की। जैश ने ही इस हमले की जिम्मेदारी ली थी।

हाफिज लश्कर-ए-तैयबा का को-फाउंडर भी है। सूत्र ने बताया- यूएन ने उसे लिस्ट में बनाए रखने का फैसला तब लिया है, जब भारत ने उसकी गतिविधियों के संबंध में बेहद गोपनीय जानकारियां और साक्ष्य यूएन को मुहैया कराए हैं। इस फैसले की जानकारी हाफिज के वकील हैदर रसूल मिर्जा को इसी हफ्ते दे दी गई है।

जमात-उद-दावा भी यूएन की प्रतिबंधित संगठनों की लिस्ट में है। मुंबई हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा समिति ने 10 दिसंबर 2008 को हाफिज सईद पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस आतंकवादी हमले में 166 लोगों की जान गई थी।

अपने वकील मिर्जा के जरिए सईद ने 2017 में यूएन में प्रतिबंध हटाने की अपील की थी। इस दौरान हाफिज पाकिस्तान में नजरबंद था। इस अपील का भारत के अलावा यूएस, यूके और फ्रांस ने भी विरोध किया था। इन देशों में भी हाफिज को प्रतिबंधित किया गया है। हालांकि, पाकिस्तान ने इस पर किसी तरह का विरोध दर्ज नहीं कराया था।

स्वतंत्र जांच अधिकारी ने कहा- हाफिज के खिलाफ पर्याप्त सबूत
यूएन ने इस मामले में डेनियल कीपर को स्वतंत्र जांच अधिकारी नियुक्त किया था। कीपर ने कहा कि सभी याचिकाओं की जांच के बाद यह तय किया गया है कि हाफिज का नाम इस लिस्ट में बना रहेगा।

कीपर ने कहा कि सभी जानकारियों को इकट्ठा करने के बाद यह तय किया गया है कि हाफिज पर बैन जारी रहे, क्योंकि उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। संयुक्त राष्ट्र सेंक्शन कमेटी ने यह अनुशंसा की है।

बीते साल के 24 मई को जम्मू के बस स्टैंड पर ग्रेनेड से हमला किया था. इस हमले में दो पुलिसकर्मी और एक आम नागरिक घायल हो गए थे. ग्रेनेड फेंकने के बाद आतंकी भागने में कामयाब रहे थे.

तत्कालीन जम्मू एसएसपी विवेक गुप्ता ने बताया कि हमले में एसएचओ जनरल बस स्टैंड राजेश जसरोतिया और उनका बॉडीगार्ड घायल हो गया था. इस धमाके की चपेट में एक आम नागरिक भी आ गया था. यह घटना तब घटी जब पुलिस पार्टी वाहनों के काफिलों को निकाल रही थी.

खुफिया एजेंसियों ने दिया था ग्रेनेड हमले का अलर्ट
तीन महीने पहले ही खुफिया एजेंसियों ने ग्रेनेड हमले का अलर्ट जारी किया था. एजेंसियों ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर के अहम प्रतिष्ठानों और सुरक्षाबलों के कैंपों पर आतंकी ग्रेनेड हमले का प्लान बना रहे हैं. इस अलर्ट के कुछ दिन बाद ही जम्मू बस स्टैंड समेत सुरक्षाबलों के कैंपों के बाहर ग्रेनेड से हमला किया गया था.

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